किसान-मज़दूर विरोधी क़ानूनों के ख़िलाफ़ ट्रैक्टर मार्च

प्रयागराज। किसान-मज़दूर विरोधी क़ानूनों के ख़िलाफ़ संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय आवाहन पर अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा ने जारी गल्लामंडी से घूरपुर तक ट्रैक्टर वाहन मार्च निकाला एवं राष्ट्रपति के नाम से छ: सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। 

टैक्टर मार्च के दौरान टैक्टरो व अन्य वाहनों को स्लोगन युक्त तख्तियों एवं झंडो से सुसज्जित कर मार्च निकाला, टेक्टर मार्च के दौरान नारे लगाए – बिजली बिल 2025 रद्द करो , बीज बिल 2025 रद्द करो, सभी फसलों को एमएसपी पर खरीद की गारंटी करो, स्मार्ट मीटर योजना रद्द करो – 300 यूनिट बिजली फ्री करो, मनरेगा कानून बहाल करो – 600 रु मजदूरी लागू करो, यमुना बालू खनन में 24 जून 2019 का आदेश रद्द करो, गरीबों को उजाड़ना बंद करो, खेती – आवास के पट्टे दो आदि।

रैली घूरपुर बाजार पहुंचकर सभा में तब्दील हो गयी। सभा के दौरान वक्ताओं ने कहा बिजली बिल 2025 लागू होने से जनता की सेवा के लिए समर्पित बिजली संस्थान निजी बड़ी कंपनियों के हाथों में चली जायेगी, बड़ी कंपनियां बिजली कारपोरेशन को सेवा के बजाय मंडी के रूप में स्थापित कर देगी, जिनके पास पैसा होगा वो बिजली प्रयोग करेगा, बिजली कंपनियां मालामाल होंगी, बड़े पैमाने पर किसान – मजदूर, दुकानदार, बिजली से वंचित रहेगा।

बीज बिल बीज पर ही नहीं! देश के कृषि संस्थानों, कृषि इकाइयों, बाजार, विश्वविद्यालयों पर कब्जा जमायेगी, विदेशी कंपनियां बीज को कंट्रोल कर देश को पूर्णत: औपनिवेशिक बना देंगी।

मनरेगा कानून गांव – खेती, छोटे बांध (डैम) के विकास का मॉडल बना था। केंद्र की आरएसएस – बीजेपी की सरकार उस मॉडल को खत्म कर विकसित भारत जी राम जी लाकर केंद्र सीधा कंट्रोल अपने हाथों में ले रही है, यह राज्यों के अधिकारों पर हमले के साथ – साथ मनरेगा मजदूरों पर भी हमला है। 125 दिन की काम की गारंटी का हल्ला मचा रही है, ये जिम्मेवारी स्वयं न लेकर राज्यों के जिम्मे छोड़ दी है। 

सभा के अंत में राष्ट्रपति के नाम छ: सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया। सभा का संचालन राजकुमार पथिक ने किया, अध्यक्षता रामकैलाश कुशवाहा ने की।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)

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